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इंटरनेट क्या हैं? [What is Internet?] –::
- इंटरनेट सूचना तकनीक की सबसे आधुनिक प्रणाली है।
- इंटरनेट को आप विभिन्न कंप्यूटर नेटवर्को का एक विश्व स्तरीय समूह (नेटवर्क) कह सकते हैं।
- यह एक ग्लोबल कंप्यूटर नेटवर्क होता है जो की बहुत से प्रकार के जानकारी और संचार सुविधाएं प्रदान करता हैं।
- यह इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की आधुनिक प्रणाली है, जो कम्युनिकेशन के मानक प्रोटोकॉल्स के माध्यम से संचारित होती है. इंटरनेट को हिंदी में 'अंतरजाल' कहते है।
- इन्टरनेट एक दुसरे से जुड़े कई कंप्यूटरों का जाल है जो राउटर एवं सर्वर के माध्यम से दुनिया के किसी भी कंप्यूटर को आपस में जोड़ता है. दुसरे शब्दों में कहे तो सूचनाओ के आदान प्रदान करने के लिए TCP/IP Protocol के माध्यम से दो कंप्यूटरों के बीच स्थापित सम्बन्ध को internet कहते हैं. इन्टरनेट विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
इंटरनेट की परिभाषा [Definition of internet in Hindi?] –:
इंटरनेट की सरल परिभाषा (Defination of Internet in Hindi)
इंटरनेट कब बना?||इंटरनेट का अविष्कार||
सबसे पहले इंटरनेट का अविष्कार सन 1969 में DOD (डिपार्टमेंट ऑफ़ डिफेन्स) द्वारा किया गया था।
यह इंटरनेट अमेरिकी रक्षा विभाग के द्वारा UCLA के तथा स्टैनफोर्ड अनुसंधान संस्थान कंप्यूटर्स का नेटवर्किंग करके इंटरनेट की संरचना की गई और इन्टरनेट पर सूचना को आदान प्रदान करने के लिए जिस नियम का उपयोग होता है।
उसे TCP (ट्रांसमिशन कण्ट्रोल प्रोटोकॉल) या IP (इंटरनेट प्रोटोकॉल) कहते है।
और यह सारी इंटरनेट और सन , 1979′ ब्रिटिश डाकघर पहला अंतरराष्ट्रीय कंप्यूटर नेटवर्क बना कर नये प्रौद्योगिकी का उपयोग करना आरम्भ किया।
इस नेटवर्क को ARPN (एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट इन एजेंसी ) ने बाद में इसको करीब 1980 में लॉन्च किया और सन ,1980 में ही बिल गेट्स का आईबीएम के कंप्यूटर्स पर एक माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम लगाने के लिए सौदा हुआ और इन्टरनेट का सही से इस्तेमाल करने के लिए 1984 एप्पल ने पहली बार फ़ाइलों और फ़ोल्डरों, ड्रॉप डाउन मेनू, माउस, ग्राफिक्स का प्रयोग आदि से युक्त “आधुनिक सफल कम्प्यूटर” लांच किया।
और इंटरनेट का सबसे ज्यादा और आसानी से इस्तेमाल तो तब होने लगा था जब 1989 टिम बेर्नर ली ने इंटरनेट पर संचार को सरल बनाने के लिए ब्राउज़रों, पन्नों और लिंक का उपयोग कर के वर्ल्ड वाइड वेब बनाया।
और 1998 में गूगल के आने के बाद इंटरनेट का चेहरा ही बदल गया जिससे आज हम सब वाकिफ हैं।
और एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट की स्पीड तेज होने पर एक परिवार साल भर में इंटरनेट पर होने वाले खर्च में से करीब 5 लाख रुपये बचा सकता है।
इसमें सबसे ज्यादा पैसा एंटरटेनमेंट, ऑन लाइन डील, डेली सर्च और ट्रैवल में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट के रूप में बचा सकता है।
और आज दुनिया में इंटरनेट की सबसे महंगी सेवा तुर्केमेनिस्तान में है यहां अनलिमिटेड इंटनेट एक्सेस के लिए डॉलर की दर से 2048 है, जो एक माह में 6,821.01 डॉलर तक पहुंच जाती है।
यहां सबसे सस्ती इंटरनेट सेवा 43.12 डॉलर प्रति माह में यूजर को 2 जीबी 64 केबीपीएस सीमित है। जबकि रूस में हाई स्पीड अनलिमिटेड इंटरनेट लगभग 20 डॉलर प्रति माह है और सबसे तेज इन्टरनेट सेवा दक्षिण कोरिया में यहा औसत स्पीड स्पीड 2202 केबीपीएस है जो दुनिया में सबसे तेज है और अमेरिका विश्व का सबसे अधिक इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला देश है
इन्टरनेट जैसा वास्तव में है और जैसा हम सोचते हैं कि इन्टरनेट है उनके बीच एक भारी अंतर है| आइए पहले इस बारे में स्पष्ट कर देते हैं, और फिर हम बात करेंगे कि किसने क्या किया था|
हम अपने मोबाइल फोनों, कम्प्यूटरों और टैबलेट पर जो देखते हैं तथा जो कुछ भी आदान-प्रदान करते हैं, वह सब कुछ वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का हिस्सा है| और फिर, हम वर्ल्ड वाइड वेब पर उपलब्ध सामग्री तक पहुँचने के लिए ही इन्टरनेट का उपयोग करते हैं| थोड़ा अधिक तकनीकी शब्दों में कहे तो-
इन्टरनेट- आपस में जुड़े कम्प्यूटर नेटवर्कों की एक वैश्विक प्रणाली है जो इन्टरनेट प्रोटोकॉल सुइट (टीसीपी/आईपी) का प्रयोग करके दुनिया भर की डिवाइसों को जोड़ता है|
वर्ल्ड वाइड वेब - यह एक सूचना रखने की जगह है जहाँ सभी वेब संसाधन संग्रहित होते हैं और इन्टरनेट के ज़रिये उन तक पहुंचा जा सकता है|
अब जब कि आप इस अंतर को समझ चुके हैं, यह पता लगाना आसान हो जाता है सबसे जरुरी काम किसने किया था|
चूंकि इन्टरनेट टीसीपी/ आईपी पर चलता है, तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि जिन्होंने इन प्रोटोकॉल्स का सृजन किया उन्हें इन्टरनेट की खोज का श्रेय दिया जा सकता है| वे हैं -
> रोबर्ट इलियट काह्न (बॉब काह्न के रूप में जाने जाते हैं), और
> विन्टन ग्रे सर्फ़ (विन्ट सर्फ़ के रूप में भी जाने जाते हैं)
वर्ल्ड वाइड वेब के बारे में बात करें तो, इसका सृजन भी वहीँ हुआ था जहाँ लार्ज हैड्रन कोलाईडर का हुआ था - जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित सीईआरएन मुख्यालय | सर टिमथी जॉन बर्नर्स-ली नामक व्यक्ति ने पूरे वर्ल्ड वाइड वेब की रचना की थी, जिन्हें टिम बर्नर्स-ली या TimBL के नाम से भी जाना जाता है|
मैं इस उत्तर में अन्य कोई सामग्री या चित्र पोस्ट न करने के लिए माफी चाहूँगा, लेकिन ये चीजें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं| आप उनके नाम से गूगल पर खोज कर ये सारी जानकारी पा सकते हैं|
मुझे आशा है कि आपको आपका उत्तर मिल गया होगा|
लेख के अंत में… उत्तर का अनुरोध करने के लिए मैं आपको धन्यवाद् देता हूँ| यह बात मेरे लिए बहुत मायने रखती है|
इंटरनेट शटडाउन का मतलब है एक ही जगह इंटरनेट का बंद हो जाना या एक ही लोकेशन पर इंटरनेट को बंद कर देना। इसका उपयोग आमतौर पर दंगो के समय करा जाता है। ताकि लोग इंटरनेट के जरिए गलत सामग्री ना फेला सके।
इंटरनेट शटडाउन के सबसे ज्यादा मामले भारत मै होते है।
19 दिसंबर 2019 को भारत में 95वीं बार इंटरनेट शटडाउन हुआ। ये इंटरनेट शटडाउन नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन होने के बाद किया गया।
यह इंटरनेट शटडाउन दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में करा गया।
इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च इंटरनेशनल इकोनॉमी रेलांसेस की रिपोर्ट बताती है कि 2012 से अब तक देश 367 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया है वहीं 2018 में सबसे ज्यादा 134 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया।
सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन के मामले जम्मू कश्मीर है।
2012 से अब तक इंटरनेट शटडाउन के 367 में से सबसे ज्यादा मामले जम्मू कश्मीर में हुए है
जम्मू कश्मीर में 180 बार इंटरनेट शटडाउन किया गया है तथा दूसरे प्रदेशों जैसे राजस्थान में 67 बार, उत्तर प्रदेश में 20 बार, हरियाणा में 13 बार, बिहार में 11 बार तथा गुजरात में 11 बार इंटरनेट बंद रहा।
जनवरी 2012 से जनवरी 2019 तक 60 इंटरनेट शटडाउन इसे किए गए थे जो 24 घंटे से कम समय के लिए किए गए थे तथा 55 शटडाउन इसे भी थे जो लंबे समय 24 घंटे से 72 घंटे तक लागू थी और 39 शटडाउन 72 घंटे से भी ज्यादा समय के लिए लागू किए गए थे। 2012 से 2019 तक 16000 घंटो से ज्यादा समय के लिए इंटरनेट बंद रहा।
अब तक का सबसे लंबा इंटरनेट शटडाउन कश्मीर में चल रहा है कश्मीर में 5 अगस्त 2019 को शटडाउन लागू कर गया था और इसे लागू हुए अबतक 136 दिन हो चुके है इसे अभी तक हटाया नहीं गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के सभी राज्यो में साल 2012 से 2017 के बीच इंटरनेट बंद होने से लगभग 21 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है।
राज्यो में सबसे ज्यादा नुकसान गुजरात को लगभग 118 लाख डॉलर का नुकसान हुआ तथा जम्मू कश्मीर में 61 लाख डॉलर राजस्थान 18.29 लाख डॉलर उत्तर प्रदेश में 5.3 लाख डॉलर का नुकसान हुआ है।
दोस्तों इंटरनेट आज हम सब के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है..
आज बगैर इंटरनेट के जिंदगी की परिकल्पना करना भी बहुत कठिन हो जाती है।आज हर रोज लाखों जीबी का डाटा अपलोड होता है, शेयर होता है। आज फेसबुक ट्विटर कोरा जैसी साइट्स हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है इंटरनेट कैसे चलता है? और यदि भारत में कोई डाटा अपलोड कर रहा है और वह डाटा अमेरिका में डाउनलोड हो रहा है तो फिर भारत और अमेरिका के बीच में आखिर क्या पेमेंट सिस्टम है?
दोस्तों असल में इंटरनेट केबल के जरिए चलता है...प्रशांत महासागर से लेकर अटलांटिक महासागर यानी विश्व के सभी महासागरों के आर पार ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछे हुए हैं इन्हें सबमरीन केबल भी कहा जाता है।
आप लोगों को याद होगा कुछ साल पहले इजिप्ट के पास समुद्र में एक केवल कट गया था जिससे अफ्रीका में इंटरनेट बाधित हो गया। यह केवल ऑप्टिकल फाइबर की बनी होती है और इनका साइज मानव शरीर के बाल जितना ही होता है।
इंटरनेट को चलाने वाले इन ऑप्टिकल फाइबर केबल को जो समुद्र में बिछी हुई है उन्हें बड़ी-बड़ी प्राइवेट कंपनियों ने अपने पैसे लगाकर बनाई हैं और इन कंपनियों को कंपनी की भाषा में टियर-1 कंपनी बोला जाता है...
इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी को तीन भागों में बांटा गया है टियर 1, टियर 2 और टियर 3।
यानी कि वह कंपनी जो अपने पैसे लगाकर समुद्र में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई है वो टियर 1 है और tier-2 तथा टियर 3 वह कंपनी है जिन्हें हम इंटरनेट के लिए पैसा देते हैं और जिसके बदले में वह हमें इंटरनेट देती है। यानी कि tier-2&3 वह छोटी कंपनी होती है जिसकी पहुंच हर जगह होती है और वह टियर 1 कंपनी से इंटरनेट लेती है और हम ग्राहकों को इंटरनेट देती है इसके बदले में ग्राहक से पैसे लेती है और अपना कमीशन रख कर टियर 1 कंपनी को पैसे दे देती है।
अगर हम भारत की बात करें तो भारत में टियर वन कंपनी है टाटा कम्युनिकेशन।
भारत की टाटा कम्युनिकेशन कंपनी ने अपने पैसे लगाकर समुद्र में केवल बिछाई है और उसी केबल से भारत में इंटरनेट चलता है यानी कि भारत की सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां हम से पैसा लेकर अंत में टाटा कम्युनिकेशन को पैसे देती हैं।
मुझे विश्वास है कि अब आपको इस रहस्य से पर्दा उठ गया होगा कि इंटरनेट का मालिक कौन है और इंटरनेट कैसे चलता है
अनुरोध करने के लिए शुक्रिया। मैं कोशिश करूंगा कि इस जवाब ज्यादा से ज्यादा सरल बनाने कि कोशिश करूँ तो कि इसे समझने में मुश्किल ना हो।
कई बार जब हम किसी वैबसाइट पर जाते हैं तो अचानक वैबसाइट एक संदेश आता है की हम Cookies का इस्तेमाल करते हैं तो की आप का हमारी वैबसाइट इस्तेमाल करने में आसानी हो।
तो पहले समझ लेते हैं Cookies है क्या।
जब हम अपने ब्राउज़र से अलग अलग वैबसाइट पर जाते हैं तो हमारा ब्राउज़र हर चीज़ को रिकार्ड करता है। हम किस वैबसाइट पर गए, किस वैबसाइट को कितनी देर तक इस्तेमाल किया। इन सभी चीजों की जानकारी को ब्राउज़र छोटे छोटे टुकड़ों में कम्प्युटर के अंदर एक जगह पर सुरक्षित कर देता है तो की अगर आप दोबारा उस वैबसाइट पर जा रहे है तो ब्राउज़र को पता रहे की वहाँ आप को क्या पसंद है और क्या पसंद नहीं है।
उन छोटी छोटी फ़ाइल को ही Cookies कहा जाता है।
Cookies आप का समय और डेटा दोनों बचाती हैं।
क्योंकि Cookies के रूप में डेटा पहले ही सेव रहता है तो जब आप उस वेबसाइट पर जाते हैं तो वेबसाइट को पहले ही पता रहता है कि आप को किस प्रकार की चीजें पसंद हैं उस वेबसाइट पर इस तरह वो आपको वही चीज़ें दिखाएगी जो आप ज्यादा देखते हैं इस तरह फालतू की चीज़ें से बच जाते हैं।
चलिए एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं।
मान लीजिए आप किसी ऑनलाईन शॉपिंग वेबसाइट पर जा के अपने लिये एक कपड़ा देखा जो आपको पसंद आया। आपने देखा कि आपको किस रंग का किस साइज का और किस कीमत का कपड़ा पसंद आया।
लेकिन अब समय ना होने के कारण आप वेबसाइट बन्द कर के चले जाते हैं। जब आप बाद में वही वेबसाइट खोलेंगे तो आपको वही कपड़ा जिसके बारे में आप ने पहले सर्च किया था सब से पहले दिखाई देगा। लेकिन ये सिर्फ उसी वेबसाइट के साथ होगा जो cookies का प्रयोग करती होगी। जैसे कि फ़ेसबुक ने लॉगिन के लिए वन क्लिक ऑप्शन होता है जिसमें बार बार पासवर्ड नही भरना पड़ता उसमे भी यही तरीका प्रयोग किया जाता है।
इसके इलावा जब आप कोई और वेबसाइट खोलते हैं तो वहां भी यह कपड़े विज्ञापन के तौर पर दिखाए जाएंगे बशर्ते उस वेबसाइट ने अपनी वेबसाइट पर गूगल एडसेंस सक्रिय किया हो। Cookies हमारी इंटरनेट इस्तेमाल करने की आदत को समझती है और फिर उसी आधार पर आपके सामने नतीजों को रखती है।
इंटरनेट विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क सिस्टम है, जो पूरी दुनिया से डाटा को tcp/ip से इकट्ठा करता है। और पूरी दुनिया के इलेक्ट्रोनिक gadgets में transmit करता है। देखा जाए तो ये नेटवर्क, केबल्स data center, router, server, satellite और wifi tower की मशक्कत का ही परिणाम होता है। इसी सेटअप के चलते आप अपने घरों में बैठकर Netflix, Instagram, YouTube, Amazon, WhatsApp, Telegram जैसी सभी सुविधाओं का लाभ उठा पाते हैं। जाहिर सी बात इतनी सुविधाएं देने वाला ये नेटवर्क छोटा तो हो नही सकता ऐसे में आपके दिमाग में भी ये सवाल जरूर पनपा होगा की आखिर internet कितना बड़ा है ?
इंटरनेट कई तरह से काम करता है। अगर आप सोचते हैं कि internet सेट्लाइट की मदद से चलाया जाता है। और network का सारा जाल सेट्लाइट ही बिछाती है तो आपकी सोच कई मायनों में सही होने के बाद भी गलत है। हालांकि इंटरनेट सेटलाइट से भी चलाया जाता है लेकिन आम जीवन में इस्तेमाल होने वाले इंटरनेट का सेटलाइट से कोई लेना देना नही है। ये सभी कनेक्शन opticles fiber cable की मदद से चलते हैं। जिन्हें submarine cables भी कहा जाता है।
हम जिस इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं वो तीन फेस में बटां हुआ होता है और इन तीन कम्पनियों के माध्यम से इंटरनेट हम तक पहुंचता है ये तीन फेस tier -1, tier-2 , tier-3 के नाम से जाने जाते हैं।
Tier -1 में वो a1 कम्पनी आती है, जिनके केबल का नेटवर्क समुद्र के अंदर से विश्व भर में फैला है।
Tier -2 में टेलिकॉम कम्पनी का नाम आता है जो हमें इंटरनेट पहुंचाने का काम करती है। Airtel , Vodafone और Idea इन्ही कम्पनी में से एक है।
Tier 3 में लोकल इलाके की छोटी कम्पनी को रखा जाता है।
इंटरनेट की सुविधा को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने के लिए Tier -3 में आने वाली कम्पनी tier -2 की बड़ी कम्पनीज से डाटा खरीदती है जबकि tier -2 के अंतर्गत आने वाली कम्पनी tier -1 में आने वाली कम्पनी पर आश्रित रहती है। और इसी तरह से इंटरनेट का वितरण विश्व के हर कोने में होता है। अब तो आप जान गए होंगे कि internet कैसे काम करता है और आपके पास कौन से फेस की सुविधा पहुंचती है। लेकिन क्या आपको इस बात का जरा भी अंदाजा है कि internet कितनी Energy use करता है ? चलिए हम आपको बताते हैं
Internet कितनी Energy use करता है ? Internet kitni energy use karta hai ?
Chinese telecom फर्म Huawei के आंकडे इस बात की ओर इशारा करते हैं कि information and communications technology उद्योग दुनिया के 20% बिजली का उपयोग करते है और 2025 तक दुनिया में 5% carbon emissions रिलीज करने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
अध्य्यन से लेखक बताते हैं कि इंटरनेट की दुनिया के चलते आज हमारे पास डाटा की भरमार है और आने वाले समय में हमें डाटा की सुनामी देखने को मिल सकती है। दुनिया भर में आज इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत चाव से किया जा रहा है। इंटरनेट की इस क्रांति से भारत भी अछुता नही हैं
एक इंटरनेट मीम एक अवधारणा या विचार है जो इंटरनेट के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे तक तेज़ी के साथ फैलता है।
एक इंटरनेट मीम एक छवि से ईमेल या वीडियो फ़ाइल तक कुछ भी हो सकता है; हालांकि, सबसे आम मेम एक मजाकिया या मजाकिया कैप्शन के साथ एक व्यक्ति या जानवर की एक छवि है अथवा इंटरनेट मीम एक मीडिया फ़ाइल(चित्र) है, जो अक्सर मजेदार (Funny) तथा इंटरनेट के माध्यम से तेजी से फैलता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि मीम (Meme) शब्द की उत्पत्ति ऑनलाइन नहीं हुई है। वास्तव में, लेखक रिचर्ड डॉकिंस ने अपने 1976 के काम द सेल्फिश जीन में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था। जब कोई आजकल मीम कहता है, तो वे शायद इंटरनेट मीम का जिक्र करते हैं।
उदाहरण
'यू मैड ब्रो' यकीनन एक मीम है क्योंकि यह एक संवादी अभिव्यक्ति, और ट्रोलिंग / ज्वलन का एक रूप है। यह मीम की अभिव्यक्ति कथित तौर पर 2003 में शुरू हुई जब हिप-हॉप संगीतकार कैमरन ने टॉक शो होस्ट बिल ओ'रिली के साथ एक गर्म चर्चा में लगे हुए थे कि उनके संगीत बच्चों को कैसे प्रभावित करते हैं।
पिछले एक दशक में, 'यू मैड ब्रो' सहस्त्राब्दी पीढ़ी के लिए एक दैनिक वार्तालाप अवधि में विकसित हुआ है, और खुद के कई संस्करणों को 'वह पागल', 'वह पागल', 'तुम पागल क्यों', और अधिक के रूप में पैदा किया।
ईथरनेट और इंटरनेट में क्या अंतर है?
- इंटरनेट और ईथरनेट के बीच मुख्य अंतर है कि इंटरनेट एक वाइड एरिया नेटवर्क
(विस्तृत क्षेत्र नेटवर्क ( {WAN } ) है जबकि ईथरनेट एक लोकल एरिया नेटवर्क
(स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क { LAN } ) है.
इंटरनेट क्या है? - इंटरनेट एक विश्वव्यापी बड़े नेटवर्क को दर्शाता है जो दुनिया भर में बड़ी संख्या में उपकरणों आदि को जोड़ता है जैसे कि आपका फ़ोन, लैपटॉप आदि.
यह उपयोगकर्ताओं को तुरंत सूचना का आदान-प्रदान करने की क्षमता प्रदान करता है. - इसके अलावा, इंटरनेट कई संसाधन और सेवाएं प्रदान करता है जैसे आप फाइलें साझा कर सकते हैं, विभिन्न वेबसाइटों और वेब पेजों का उपयोग कर सकते हैं, ईमेल भेज सकते हैं, ऑनलाइन किताबें पढ़ सकते हैं, ऑनलाइन लेनदेन कर सकते हैं, पसंदीदा गाने सुन सकते हैं और इंटरनेट का उपयोग करके फिल्में भी देख सकते हैं.
ईथरनेट क्या है?- वहीँ दूसरी ओर, ईथरनेट एक स्थानीय (लोकल ) स्थान में उपकरणों को जोड़ता है। यह एक छोटे से भौगोलिक क्षेत्र में एक नेटवर्क है जैसे आपकी एक सोसाइटी, कॉलेज या स्कूल या फिर कोई दफ्तर.
- इंटरनेट एक वैश्विक नेटवर्क है जो दुनिया भर में कंप्यूटर नेटवर्क को जोड़ता है.
सरल शब्दों में - यह नेटवर्क का एक विशाल नेटवर्क है.
यह डेटा ट्रांसमिशन के लिए टीसीपी / आईपी प्रोटोकॉल का उपयोग करता है. इसकी मदद से उपयोगकर्ता तुरंत जानकारी साझा कर सकते हैं.
यह संसाधनों को साझा करने और फ़ाइल साझा करने के लिए वर्ल्ड वाइड वेब और इलेक्ट्रॉनिक मेलिंग जैसी सेवाएं प्रदान करता है.
इंटरनेट में, डेस्कटॉप कंप्यूटर, राउटर, स्विच और अन्य डिवाइस केबल से या वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े होते हैं.
आजकल और अधिक उन्नत तकनीक जैसे फाइबर ऑप्टिक्स भी इस्तेमाल में आ चुकी है जो की इंटरनेट को और भी तेज़ और शक्तिशाली बनाती है. - ईथरनेट एक तार ( वायर्ड कनेक्शन ) के माध्यम से कंप्यूटर को नेटवर्क से जोड़ने का काम करता है.
यह एक इंटरफ़ेस है जो कंप्यूटर और स्विच जैसे कई उपकरणों को जोड़ता है.
इसका उपयोग स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क के लिए किया जाता है जो एक छोटे भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नेटवर्क है जैसे स्कूल, कॉलेज, दफ्तर आदि.
ईथरनेट फ्रेम के रूप में डेटा भेजता है और इन फ़्रेमों में स्रोत और गंतव्य (डेस्टिनेशन ) के पते और त्रुटि का पता लगाने वाले तंत्र (मैकेनिज्म) शामिल रहते हैं. - ईथरनेट केबल एक सामान्य टेलीफोन केबल की तुलना में थोड़ा मोटा होता है, और इसमें RJ45 कनेक्टर होता है.
यह कनेक्टर आपके लैपटॉप,डेस्कटॉप और राऊटर में पाया जाता है, इसी कनेक्टर में ईथरनेट केबल लगा कर इंटरनेट चला सकते हैं.
ईथरनेट के कई मानक होते हैं जैसे - 10BASE-T - इसकी गति 10Mbps तक है.
100BASE-T - इसकी गति 100Mbps तक
और 1000BASE-T की 1000Mbps तक की गति है. - इंटरनेट की तुलना में ईथरनेट अधिक सुरक्षित है.
ईथरनेट में, बाहरी उपकरणों की नेटवर्क तक पहुंच नहीं है, इसमें सिर्फ वो ही उपकरण काम करते हैं जो इससे जुड़े हुए हैं.
वहीँ दूसरी ओर, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को खुली पहुँच प्रदान करता है इसलिए, कोई भी उपयोगकर्ता आपके नेटवर्क तक पहुंच सकता है और आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकता है.
उम्मीद करता हूँ सर आपको जवाब पसंद आया होगा.
इंटरनेट से क्या-क्या सुविधाएं होती हैं?-:
- शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यकता [Uses of Internet in Education] -:
इंटरनेट का शिक्षा के विकास में बहुत योगदान हैं. इसके लिए इसे हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं -
| शिक्षा का क्षेत्र | इंटरनेट से प्राप्त सहायता |
| परीक्षा देना | GMAT, GRE, SAT, बैंकिंग एग्जाम और विभिन्न एंट्रेंस एग्जाम आजकल ऑनलाइन ही लिए जाते हैं. |
| ट्रेनिंग प्राप्त करना | सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग, वेब टेक्नोलॉजी, कंपनी सेक्रेटरी, आदि कोर्सेज के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग की सुविधाएँ इंटरनेट के द्वारा ही उठाई जा सकती हैं. |
| दूरस्थ शिक्षा
[Distance Learning] | विभिन्न विश्वविद्यालयों [यूनिवर्सिटी] द्वारा घर बैठे शिक्षा प्राप्त करने का अवसर आपको इंटरनेट द्वारा ही प्राप्त होता हैं. |
इंटरनेट - शब्दावली - Internet - Terminology-प्रोटोकॉल (Protocol)
प्रोटोकॉल (Protocol): यह एक ऐसी मानक और औपचारिक प्रक्रिया है प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कम्प्यूटरों तथा संजालों (नेटवर्कों) में अंकीय संचार किया जाता है|
सूचना का यह आवागमन खास परिपाटी से होता है, जिसे प्रोटोकॉल कहते हैं और नेटवर्क के प्रत्येक कम्प्यूटर नेटवर्क का उपयोग इलेक्ट्रानिक संचार में किया जाता है।
प्रोटोकॉल यह एक ऐसी मानक और औपचारिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से कम्प्यूटरों तथा संजालों (नेटवकों) में अंकीय संचार किया जाता है।
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